Career

समादरणीय श्री

            सादर नमस्ते जी,

                        ईश्वरकृपया सर्वमत्र कुशलं तत्राप्यस्तु !!

            पूज्य स्वामी सत्यपति जी द्वारा संस्थापित आपका अपना दर्शन योग महाविद्यालय ईश्वर की महती अनुकम्पा से अपना प्रधान कार्य, ब्रह्मवेत्ता-योगाभ्यासी-विद्वान निर्माण कार्य, निरंतर कर रहा है । जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्र में अनेक आचार्य, संन्यासी, योगाभ्यासी, विद्वान, कार्यकर्ता कार्य कर रहे हैं । इस मुख्य कार्य के साथ-साथ अनेक प्रकार के शिविर, सम्मेलन, पाठ आदि से देशभर में इस वैदिक योगविद्या का, आध्यात्मिक दर्शनविद्या का निरंतर प्रचार-प्रसार किया है । इस प्रकार के अनेक कार्यों में से एक कार्य पुस्तक-प्रकाशन व वितरण कार्य है।

            इन विकट परिस्थितियों में मुख्य कार्यों को करते हुए ईश्वर की कृपा से अनेक भाषाओं में पुस्तकों को प्रकाशित करते कराते हुए इस वैदिक विद्या को घर घर तक पहुंचाया गया है। आप लोगों का भी जैसे-जैसे तन मन धन से सहयोग मिला, वैसे-वैसे यह कार्य होता रहा । इस प्रकल्प को निरंतर चालू रखने के लिए हम सभी प्रयासशील हैं। आप को हर्षित होगा कि वर्ष 2017 में दर्शन योग धर्मार्थ ट्रस्ट द्वारा लगभग 17 नईपुस्तकों का प्रकाशन किया गया है तथा अन्य भाषाओं में भी अनेक पुस्तकें प्रकाशित की गई हैं । आप लोगों के सहयोग, सद्भावना बिना यह कार्य असंभव था और आज भी है । आज के समयानुसार आधुनिक तकनीकी आकर्षण-शैली आवश्यक हो जाती है । जिसके लिए हमें जन-धन-समय की अधिक अपेक्षा रहती है । इसलिए आप से निवेदन करते हैं कि हम सभी उत्साहपूर्वक संगठित हो कर यथा सामर्थ्य तन-मन-धन से सहयोग करते हुए इस ऋषि कार्य को संपादितकरते रहें ।

 

दर्शन शास्त्र, शंका समाधान तथा अध्यात्म सम्बन्धी महत्त्वपूर्ण पुस्तकों के प्रकाशन की विशेषयोजना......

तत्काल में प्रकाशित होने वाली पुस्तकें

  1. फेसबुक शंका समाधान

 विभिन्न सामाजिक, आध्यात्मिक जिज्ञासाओं एवं शंकाओं का तर्क एवं प्राचीन प्रज्ञा स्रोत वेद, उपनिषद तथा दर्शन ग्रंथ आदि शास्त्रों का प्रमाणों सहित समाधान, फ़ेसबुक के माध्यम से स्वामी विवेकानंद जी नियमित रूप से कर रहे हैं । जिससे हजारों व्यक्ति लाभान्वित हो रहे हैं । उनमें से महत्त्वपूर्ण अंशों का संकलन व सम्पादन श्री डॉ राधावल्लभ जी ने किया है । आशा है कि इस संकलन का पाठकगण में पूर्व प्रकाशित पुस्तक ‘उत्कृष्ट शंका समाधान’ की तरह स्वागत होगा ।

लेखक / समाधानकर्ता

श्री स्वामी विवेकानंद जी परिव्राजक  

सम्पादक

डॉ . राधावल्लभ जी

विभाग

आध्यात्मिक  विज्ञान

आकार(cm)

14x22(डेमी16 पेजी साइज़)

पृष्ठ

128

वजन

लगभग 200ग्राम

छपाई

उत्तम एवं एक रंग में

पेपर

अच्छे मेपलिथो कागज़ (80 ग्राम)

टाइटल

बहुरंगी, पेपर बेक (अजिल्द), UV सहित

गेटअप

आकर्षक

मूल्य

`50.00

छूट

10% से 40% तक

           

 

  1. आत्मनिरीक्षण

            अध्यात्म मार्ग में शीघ्र उन्नति करने हेतु आत्मनिरीक्षण एक महत्वपूर्ण कार्य है । आत्मनिरीक्षण क्या है ? आत्मनिरीक्षण कितने प्रकार के हैं ? आत्मनिरीक्षण के पूर्व कैसी तैयारी करनी चाहिये ? आत्मनिरीक्षण करने से लाभ ? और न करने से हानियाँ ? आत्मनिरीक्षण करने की विधि क्या है ? क्या आत्मनिरीक्षण में हमें सिर्फ दोषों को देखना चाहिए, गुणों को नहीं ? आदि-आदि विषयों पर स्वामी विवेकानंद जी द्वारा प्रकाश डाला गया है ।                            

लेखक / समाधानकर्ता

श्री स्वामी विवेकानंद जी परिव्राजक  

सम्पादक

डॉ . राधावल्लभ जी

विभाग

आध्यात्मिक  विज्ञान

आकार(cm)

14x22(डेमी16 पेजी साइज़)

पृष्ठ

144

वजन

लगभग 140ग्राम

छपाई

उत्तम एवं एक रंग में

पेपर

अच्छे मेपलिथो कागज़ (80 ग्राम)

टाइटल

बहुरंगी, पेपर बेक (अजिल्द), LEMINATION / UV COATINGसहित

गेटअप

आकर्षक

मूल्य

`50.00

छूट

10% से 40% तक

  1. योग सुधा  

                        पूज्य स्वामी सत्यापति जी समाधिस्थ महान पुरुष हैं । ईश्वर जिनका ध्येय है । उनके उपदेश, उनके व्यवहार की अध्यात्म मार्ग में शीघ्र उन्नति करने हेतु एक महत्वपूर्ण भूमिका रहती है । ईश्वरप्रणिधान, प्रलयावस्था सम्पादन, जप, आत्मनिरीक्षण, निदिध्यासन, ईश्वर, सुख, दुःख आदि-आदि की परिभाषा, लाभ, महत्व आदि के साथ-साथ व्यावहारिक विद्या का उपदेश भी स्वामी मुक्तानंदजी जी द्वारा संग्रह किया गया है । उसको व्यवस्थित रूप में प्रकाशन किया जा रहा है ।

उपदेशक

स्वामी सत्यापति जी परिव्राजक  

लिपिलेखक

स्वामी मुक्तानंद जी परिव्राजक

सम्पादक

डॉ . राधावल्लभ जी

विभाग

आध्यात्मिक  विज्ञान

आकार(cm)

14x22(डेमी16 पेजी साइज़)

पृष्ठ

48

वजन

लगभग 100ग्राम

छपाई

उत्तम एवं एक रंग में

पेपर

अच्छे मेपलिथो कागज़ (80 ग्राम)

टाइटल

बहुरंगी, पेपर बेक (अजिल्द), LEMINATION  सहित

गेटअप

आकर्षक

मूल्य

`35.00

छूट

10% से 40% तक

 

            दार्शनिक विद्वान तथा शंका समाधान के विशेषज्ञ स्वामी विवेकानंद जी को दर्शन शास्त्र के पढ़ाने का लंबा अनुभव है । उनके द्वारा भाष्य सहित पढ़ाये गएन्यायदर्शन भाष्य  तथा सांख्यदर्शन भाष्यको लेखबद्ध करने का कार्य आरंभ कर दिया गया है । आगे दर्शन विद्या के प्रेमी महानुभावों हेतु इसके प्रकाशन की योजना है और उसे गुरुकुल,पाठशालाओं,युनिवर्सिटियों,धर्माचार्यों,वैज्ञानिकों,न्यायाधीशों,बुद्धिजीवियों को भेंट स्वरूप वितरित किया जाएगा । इन ग्रंथो का विवरण इस प्रकार है । दोनों ग्रन्थों की अच्छे मेपलिथो कागज़ (80 ग्राम) की आकार :- 20X30- 8 पेजी (क्राउन साइज़),पेपर बेक (अजिल्द) में आकर्षण बहुरंगी टाइटल LEMINATION / UV COATINGके साथ रहेगी ।

 

आप इस योजना में सहभागी हो सकते  हैं

  • इन पुस्तकों के वितरण में सहयोगी बनने हेतु अपना सात्विक दान प्रदान कर सकते है । Rs- 50,000/- तथा Rs 1,00,000/- प्रदान करने वालों की इच्छानुसार सचित्र-परिचय पुस्तक में प्रकाशित किया जाएगा । इससे कम सहयोग भी स्वीकार्य है । न्यूनतम  Rs- 5,000/- तक सहयोग करने वालों के नाम पुस्तक में प्रकाशित किए जाएंगे ।
  • पुस्तक प्रकाशन में Rs- 10,000/-  प्रदान करके अग्रिम ग्राहक बन सकते हैं । पुस्तकों का प्रकाशन होने पर लागत मूल्य पर आपकी इच्छानुसार उतने मूल्य की पुस्तकें उपलब्ध कराई जाएंगी ।

                   शेष कुशल । यथा योग्य सेवा अवश्य लिखें । धन्यवाद ।

आप का

आचार्य दिनेशकुमार

तत्काल में प्रकाशित होने वाली पुस्तकें

Recent update में news आफर आदि डालने की व्यवस्था

तत्काल में प्रकाशित होने वाली पुस्तकें – aatmanirikshan

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